🎭 भाग 3: एलीट क्लास का 'मनी लॉन्ड्रिंग' खेल और नासा का 'प्राइवेट' मोहरा


​पिछले भाग में हमने देखा कि मस्क को पेपाल (PayPal) से बाहर कर दिया गया था।

 अब यहाँ से शुरू होता है मस्क को "दुनिया का सबसे अमीर आदमी" बनाने का असली फाइनेंशियल ड्रामा।


​1. eBay डील: एक जेब से पैसा निकालकर दूसरी में डालना


​2002 में eBay ने पेपाल को 1.5 बिलियन डॉलर में खरीदा। अब गौर कीजिए कि eBay के पीछे कौन था?


​पियरे ओमिद्यार (Pierre Omidyar): eBay के मालिक पियरे का सीधा संबंध 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' (WEF) और उन ग्लोबल नेटवर्क्स से है जो दुनिया की सरकारों को कंट्रोल करते हैं।


​   मस्क को 180 मिलियन डॉलर मिलना कोई सामान्य बिज़नेस डील नहीं थी। यह एलीट क्लास द्वारा किया गया एक 'फंड ट्रांसफर' था।


 उन्होंने मस्क को एक 'सफल बिजनेसमैन' का टैग दिया और उसकी जेब में इतना पैसा डाल दिया कि वह अगले बड़े और खतरनाक प्रोजेक्ट्स—SpaceX और Tesla—की नींव रख सके। 


यह पैसा मस्क की मेहनत का नहीं, बल्कि एलीट क्लास का 'बीज' (Seed Money) था।


​2. Sequoia Capital और वो 'अदृश्य' हाथ


​पेपाल के समय से ही मस्क के पीछे Sequoia Capital खड़ी थी। इसके मालिक डॉन वैलेंटाइन, डगलस लियोन और माइकल मोरिट्ज़ जैसे लोग हैं।


​ये वो लोग हैं जो सिलिकॉन वैली की हर उस कंपनी को कंट्रोल करते हैं जो जनता का डेटा चुराती है (जैसे Google और Apple)।


​इन्होंने ही मस्क को वह 'नेटवर्क' दिया जिससे उसे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सके।

 इन फर्म्स का पैसा सीधे तौर पर उन पुराने एलीट परिवारों से आता है जो पर्दे के पीछे से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चलाते हैं।


​3. रूस का 'फेक' दौरा और 'रॉकेट साइंस' का सफेद झूठ


​मस्क का रूस जाना एक सोची-समझी स्क्रिप्ट थी। मस्क ने दावा किया कि रूसी अधिकारियों ने उन्हें खाली हाथ लौटा दिया और उन्होंने वापस आते समय किताबों से रॉकेट बनाना सीख लिया।


​     कोई भी इंसान 10 घंटे की फ्लाइट में 'एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग' नहीं सीख सकता। असल में, रूस का ड्रामा इसलिए किया गया ताकि दुनिया को लगे कि मस्क को कहीं से मदद नहीं मिली।


​हकीकत में, रूस से लौटते ही मस्क को माइक ग्रिफिन (जो बाद में NASA के चीफ बने) और In-Q-Tel (CIA की अपनी निवेश कंपनी) का पूरा साथ मिला। 


नासा ने अपनी दशकों पुरानी 'सीक्रेट फाइल्स' और रिटायर्ड वैज्ञानिक मस्क की गोद में डाल दिए।


​4. SpaceX और 'X' का रहस्यमयी जुनून


​मस्क ने अपनी कंपनी का नाम SpaceX ही क्यों रखा? और अब ट्विटर को X क्यों कर दिया?


​सांकेतिक खेल -  एलीट क्लास की प्राचीन गूढ़ विद्याओं (Occult) में 'X' का मतलब होता है 'तब्दीली' या 'विनाश और निर्माण'।

 यह एक नए युग (New World Order) के आगाज़ का संकेत है।


​मस्क की गाड़ियों के मॉडल (Model S, 3, X, Y) को जोड़ें तो 'SEXY' बनता है, जो युवाओं को अपनी तरफ खींचने का एक घटिया मार्केटिंग तरीका है, ताकि लोग इनके पीछे के खतरनाक इरादों को न देख सकें।


​5. नासा का 'प्राइवेट फ्रंट' क्यों बना SpaceX?


​नासा एक सरकारी संस्था है, उसका ऑडिट होता है और उसे जनता को जवाब देना पड़ता है। 


एलीट क्लास को एक ऐसी 'प्राइवेट कंपनी' चाहिए थी जिस पर कोई कानून लागू न हो।


​नासा ने मस्क को तब अरबों डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट दिए जब उसके रॉकेट बार-बार फेल हो रहे थे। किसी और को यह पैसा कभी नहीं मिलता।


​असली मकसद: Starlink के जरिए अंतरिक्ष में हजारों सैटेलाइट्स का जाल बिछाना।

 यह इंटरनेट के लिए नहीं, बल्कि पूरी धरती के एक-एक इंच की 24 घंटे निगरानी (Surveillance) के लिए है।


 मस्क वह 'चौकीदार' है जिसे एलीट क्लास ने आसमान पर पहरा देने के लिए बिठाया है।


​निष्कर्ष यह है कि, 

 मस्क को पैसा 'eBay' के जरिए दिया गया, तकनीक 'NASA' और 'CIA' से मिली, और 'हीरो' की छवि 'मीडिया' ने बनाई।

 वह कोई वैज्ञानिक नहीं, बल्कि एलीट क्लास का एक 'आउटसोर्सिंग एजेंट' है।


​अगले भाग में (भाग-4): हम Tesla की परतों को उधेड़ेंगे। क्या वाकई इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ पर्यावरण बचा रही हैं? या फिर मस्क आपको 'स्मार्ट सिटी' के उन पिंजरों में कैद करने की तैयारी कर रहा है,

 जहाँ आपकी आवाजाही का कंट्रोल एक 'सॉफ्टवेयर' के हाथ में होगा? और मस्क की 'ब्लैक आई' का वो डरावना सच क्या है?

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट